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Pitru Paksha  2020 Pitru Paksha  2020

Pitru Paksha 2020

हिन्दू पंचांग के अनुसार,पितृपक्ष/श्राद्ध पक्ष 2 सितंबर से शुरू हो रहे हैं जो 17 सितंबर को समाप्त होंगे। श्राद्ध में पितरों के तर्पण हेतु दान-पुण्य एवं अन्य प्रकार के कर्मकांड किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध में दानपुण्य किया जाना चाहिए।भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि पूर्णिमा तिथि कहलाती है। इस साल यह तिथि 2 सितंबर बुधवार के दिन पड़ रही है। भाद्रपद पूर्णिमा को श्राद्ध पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के सत्यनारायण रूप की पूजा की जाती है, साथ ही इस दिन उमा-महेश्वर व्रत भी रखा जाता है। इसी दिन गणेश विसर्जन भी किया जाता है। भाद्रपद पूर्णिमा को पूर्णिमा श्राद्ध होता है। पूर्णिमा के बाद एकादशी, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्टी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी और अमावस्या श्राद्ध आता है। हिंदूओं में जातक के गर्भधारण से लेकर मृत्योपरांत तक अनेक प्रकार के संस्कार किये जाते हैं। अंत्येष्टि को अंतिम संस्कार माना जाता है। लेकिन अंत्येष्टि के पश्चात भी कुछ ऐसे कर्म होते हैं जिन्हें मृतक के संबंधी विशेषकर संतान को करना होता है। श्राद्ध कर्म उन्हीं में से एक है। वैसे तो प्रत्येक मास की अमावस्या तिथि को श्राद्ध कर्म किया जा सकता है लेकिन भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक पूरा पखवाड़ा श्राद्ध कर्म करने का विधान है। इसलिये अपने पूर्वज़ों को के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के इस पर्व को श्राद्ध कहते हैं।

मान्यता है पितृपक्ष के दौरान पितरलोक से हमारे पूर्वज अपने-अपने परिजनों से मिलने और उनको आशीर्वाद देने के लिए पृथ्वी पर आते हैं। पितृपक्ष में पितरों को प्रसन्न करने के लिए उन्हें तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान दिया जाता है। पितृपक्ष में ऐसा करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है। देश में कुछ ऐसे स्थान है जहां पर पितरों को तर्पण और पिंडदान करने का विशेष महत्व और पौराणिक इतिहास है। सनातन धर्म में पितृपक्ष का समय पितरों के तर्पण और श्राद्ध के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस समय लोग अपने पितरों को याद करके उनसे आशीर्वाद लेते हैं। पितृपक्ष भादप्रद मास की पूर्णिमा तिथि से आरंभ होकर अश्विन मास की अमावस्या तक रहता है। पितृपक्ष में 16 दिन होते हैं। इसबार पितृपक्ष का समय 2 सितंबर से आरंभ होकर 17 सितंबर तक रहेगा। पितृपक्ष का आगमन राहु के नक्षत्र शतभिषा में हो रहा है और राहु के नक्षत्र में इस पक्ष का आरम्भ होना ज्योतिष की नजर में बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। पूर्णिमा तिथि 1 सितंबर 2020 को सुबह 09:40 बजे से शुरू होगी। जो 2 सितंबर 2020 को सुबह 10:50 बजे तक रहेगी। इस दौरान कोई भी ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए, जिससे आपके पितर आपसे नाराज हो जाएं। जानते हैं कि पितपक्ष में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

पितरों का श्राद्ध की विधि —- श्राद्ध में पिंडदान, तर्पण और ब्राह्मण भोज कराया जाता है। इसमें चावल, गाय का दूध, घी, शक्कर और शहद को मिलाकर बने पिंडों को पितरों को अर्पित किया जाता है। जल में काले तिल, जौ, कुशा यानि हरी घास और सफेद फूल मिलाकर उससे विधिपूर्वक तर्पण किया जाता है। इसके बाद ब्राह्मण भोज कराया जाता है। वैसे तो प्रत्येक मास की अमावस्या को पितरों की शांति के लिये पिंड दान या श्राद्ध कर्म किये जा सकते हैं लेकिन पितृ पक्ष में श्राद्ध करने का महत्व अधिक माना जाता है। पितृ पक्ष में किस दिन पूर्वज़ों का श्राद्ध करें इसके लिये शास्त्र सम्मत विचार यह है कि जिस पूर्वज़, पितर या परिवार के मृत सदस्य के परलोक गमन की तिथि याद हो तो पितृपक्ष में पड़ने वाली उक्त तिथि को ही उनका श्राद्ध करना चाहिये। यदि देहावसान की तिथि ज्ञात न हो तो आश्विन अमावस्या को श्राद्ध किया जा सकता है इसे सर्वपितृ अमावस्या भी इसलिये कहा जाता है। समय से पहले यानि जिन परिजनों की किसी दुर्घटना अथवा सुसाइड आदि से अकाल मृत्यु हुई हो तो उनका श्राद्ध चतुर्दशी तिथि को किया जाता है। पिता के लिये अष्टमी तो माता के लिये नवमी की तिथि श्राद्ध करने के लिये उपयुक्त मानी जाती है। पितरों के प्रसन्न होने पर देवता भी प्रसन्न होते हैं। इसके पिछे यह मान्यता भी है कि यदि विधिनुसार पितरों का तर्पण न किया जाये तो उन्हें मुक्ति नहीं मिलती और उनकी आत्मा मृत्युलोक में भटकती रहती है। पितृ पक्ष को मनाने का ज्योतिषीय कारण भी है। ज्योतिषशास्त्र में पितृ दोष काफी अहम माना जाता है। अक्सर हम देखते हैं कि कई लोगों के जीवन में परेशानियां समाप्त होने का नाम ही नहीं लेती। वे चाहे जितना भी समय और धन खर्च कर लें लेकिन काम सफल नहीं होता। ऐसे लोगों की कुंडली में निश्चित रूप से पितृदोष होता है।यह दोषी पीढ़ी दर पीढ़ी कष्ट पहुंचाता रहता है, जब तक कि इसका विधि-विधानपूर्वक निवारण न किया जाए। आने वाली पीढ़ीयों को भी कष्ट देता है। इस दोष के निवारण के लिए कुछ विशेष दिन और समय तय हैं जिनमें इसका पूर्ण निवारण होता है। श्राद्ध पक्ष यही अवसर है जब पितृदोष से मुक्ति पाई जा सकती है। इसलिये पितृदोष से मुक्ति के लिये भी पितरों की शांति आवश्यक मानी जाती है। पितृपक्ष में पूर्वजों को याद करके पूजा-पाठ के अलावा दान-धर्म किया जाता है। इन दिनों ग्रहों की शांति के लिए दान-पुण्य और पूजा पाठ किए जाते हैं, ताकि हम पर पूर्वजों की कृपा बनी रहे। इन दिनों श्राद्ध कर्म से  पितरगण वंश विस्तार का आशीर्वाद देते हैं। परिवार के धन-धान्य में बढ़ोतरी होती है ।

पूर्णिमा श्राद्ध – 2सितंबर 2020 , बुधवार

1  प्रतिपदा श्राद्ध – 3 सितंबर2020  गुरुवार

2  द्वितीया श्राद्ध –  4 सितंबर 2020   शुक्रवार

3 तृतीया श्राद्ध- 5 सितंबर 2020 शनिवार

4  चतुर्थी श्राद्ध-6 सितंबर2020  रविवार

5  पंचमी श्राद्ध- 7 सितंबर 2020  सोमवार

6 षष्ठी श्राद्ध-8सितंबर2020 मंगलवार

7 सप्तमी श्राद्ध- 9 सितंबर2020  बुधवार

8 अष्टमी श्राद्ध-  10 सितंबर 2020  गुरुवार

9 नवमी श्राद्ध- 11 सितंबर 2020 शुक्रवार

10  दशमी श्राद्ध- 12 सितंबर 2020 शनिवार

11  एकादशी श्राद्ध- 13 सितंबर 2020 रविवार

12  द्वादशी श्राद्ध- 14 सितंबर 2020  सोमवार

13  त्रयोदशी श्राद्ध- 15 सितंबर 2020  मंगलवार

14  चतुर्दशी श्राद्ध- 16 सितंबर 2020 बुधवार

15  सर्वपितृ अमावस श्राद्ध -17 सितंबर piy2020  गुरुवार

श्राद्ध में किए गए तर्पण से प्रसन्न होकर पूर्वज स्वास्थ्य, बल, श्रेय, धन-धान्य और सभी सुखों का आशीर्वाद देते हैं। श्रद्धापूर्वक श्राद्ध करने वाले के परिवार में कोई क्लेश नहीं रहता है। पितृ पक्ष का समय पूरी तरह से पितरों को समर्पित है। श्राद्ध में पितरों का तर्पण करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और पितरों का आशीर्वाद भी मिलता है। वेदों और पुराणों में पितरों की संतुष्टि के लिए मंत्र ,स्तोत्र एवं सूक्तों का वर्णन है जिसके नित्य पठन से किसी भी प्रकार की पितृ बाधा क्यों ना हो ,शांत हो जाती है  अगर नित्य पठन संभव ना हो , तो कम से कम प्रत्येक माह की अमावस्या और आश्विन कृष्ण पक्ष अमावस्या अर्थात पितृपक्ष में अवश्य करना चाहिए।पितृ पक्ष में पीपल की परिक्रमा अवश्य करें अगर १०८ परिक्रमा लगाई जाएँ ,तो पितृ दोष अवश्य दूर होगा। सूर्य पिता है अतः ताम्बे के लोटे में जल भर कर ,उसमें लाल फूल ,लाल चन्दन का चूरा ,रोली आदि डाल कर सूर्य देव को अर्घ्य देकर ११ बार “ॐ घृणि सूर्याय नमः ” मंत्र का जाप करने से पितरों की प्रसन्नता एवं उनकी ऊर्ध्व गति होती है। वेदों और पुराणों में पितरों की संतुष्टि के लिए मंत्र ,स्तोत्र एवं सूक्तों का वर्णन है जिसके नित्य पठन से किसी भी प्रकार की पितृ बाधा क्यों ना हो ,शांत हो जाती है  अगर नित्य पठन संभव ना हो , तो कम से कम प्रत्येक माह की अमावस्या और आश्विन कृष्ण पक्ष अमावस्या अर्थात पितृपक्ष में अवश्य करना चाहिए।

 

 

Happy Independence Day Happy Independence Day

Happy Independence Day

India’s Independence Day 2020 symbolized for its people was the beginning of an era that was filled with hope. In 1947, the country embarked on its long march to overcome the colonial legacy of economic underdevelopment, poverty, illiteracy, the wide prevalence of the disease, and stark social inequality and injustice. Post-independence the tasks of building a nation were taken up by the people of India, and their leaders with determination and confidence. The buoyant mood was felt in Pandit Nehru’s first speech on the eve of independence. As an Independent nation, India started with a wide social consensus on the basic outline of the constitution of India that was to be built. The ethos and value of secularism, nationalism, and keeping up with the policy of democracy was the core factor to be maintained. This entire factor was a great advantage, and that made India stronger compared to her neighbors.

Ever since then India has preserved, consolidated, and strengthen the unity in diversity to push forward the process in the making of a vibrant nation. 75 years of Independence, today India strives to protect the nation-state and build up a nation that stands testimony to the development and social transformation. It was not an easy task to keep this huge country bunched together, which has varied cultures and traditions. It was by recognizing and accepting this diversity; the immense regional culture, ethnic and religious multiplicity that India further strengthened as a secular nation. It is Indianness redefined.

When India earned its freedom from the British, the leaders’ had the farsightedness and dedication to stirring this nation to safety; the first thing towards nation-building was to address the social engineering factor. The nation had a large section of illiterate people; next was to undertake an economic development within a democratic political structure.

Today India is a country for its people, the people who struggled to build India for its next generation. August 15, 1947, was the day of hope that ushered a period of change and development. Today the world acknowledges and appreciates India’s rich linguistic, cultural, religion, and ethnic diversity. No nation in the world has emerged as strong as India while keeping away narrower identities. The diversities and multiple identities are still not an obstacle in Modern India.

India continues to celebrate its 75th year of Independence without letting class divisions to come its way. It still upholds the values of unity in diversity and national integration. The country still maintains cultural interaction and diversity; it is the will of the people to keep this nation united in an evolving composite culture. The achievement of independence has in some ways quickened the process of accepting and adapting to multi-culture in India. The complex and intricate interrelation between people diminished and going strong.

Today, as a nation that still practices democracy in its true form, India continues to enjoy another golden age. Every Indian is a proud citizen to experience this extraordinary opportunity. India will continue to travel on the lines of unity in diversity that calls for courage, wisdom, and determination. As a sovereign nation, India continues to uphold the values and institutions of democracy and re-discover the virtue of self-scrutiny and self-restraint for a bright future.

Let the nation be blessed as it on its 75th-year and chose to be a nation that upholds humanitarian principles, and continue to prosper.

Raksha Bandhan – ShubhMuhurat Raksha Bandhan – ShubhMuhurat

Raksha Bandhan – ShubhMuhurat

——– 3 अगस्त 2020 Raksha Bandhan ka shubh muhurat janniye ——

रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त(Raksha Bandhan-ShubhMuhurat)

इस दिन बहने अपने भाई को राखी बांधती है, और भाई अपनी बहनो को रक्षा का वचन देता है।

इस   बार शुभ मुहूर्त  श्रावण मास की पूर्णिमा 3 अगस्त 2020 सोमवार के दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा । इसी दिन बहने अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधेगी ।
मान्यता है कि   राखी बांधने के समय भद्रा नहीं होनी चाहिए  कहते हैं कि रावण की बहन ने उसे भद्रा काल में ही राखी बांध दी थी इसलिए रावण का विनाश हो गया. 3 अगस्त को भद्रा सुबह 9 बजकर 24 मिनट तक है।राखी का त्योहार सुबह 9 बजकर 24मिनट से शुरू हो जाएगा. दोपहर को -1 बजकर 40 मिनट (1:40 P.M)- से लेकर शाम 4 बजकर 35 मिनट ( 4:35 P.M) तक बहुत ही अच्छा समय है। इसके बाद शाम को 7 बजकर  30 ( 7:30 P.M )मिनट से लेकर रात- 9.30pm- के बीच में बहुत अच्छा मुहूर्त है।

प्रदोष काल का शुभ मुहूर्त– – 7  बजकर 10 से 21 बज कर 15 तक (7:30 A.M – 21:15 P.M ) .

पूर्णिमा तिथि 2 अगस्त को रात्री 9:15 से

3 अगस्त 2020, सोमवार 9.30 तक.

Solar Eclipse – 21st June 2020 Solar Eclipse – 21st June 2020

Solar Eclipse – 21st June 2020

Solar Eclipse – 21st June 2020 (From 09:15 AM to 3:34 PM)

The phenomenon of the Eclipse is known as Grahan in the Sanskrit Language, and it is not only an astronomical occurrence but something beyond the realm of astronomy. The solar eclipse or surya grahan that will take place on June 21 will be the first solar eclipse of 2020. What’s interesting is that June 21 will also mark the longest day and shortest night of the year. The solar eclipse will begin at 9.15 am in the morning.
In India, The full eclipse( Surya Grahan) will start near Gharsana in Rajasthan around 10:14 am with the maximum eclipse occurring at 12:10 pm. The full eclipse will be visible until 2:02 pm and end at around 3:34pm in the afternoon in India.
During the eclipse, the Moon will move directly in front of the Sun to form a powerful annular solar eclipse beginning in East Africa and end after crossing China, in the Pacific. This kind of solar eclipse is called a Ring of Fire due to the outer edge of the Sun’s circumference flaming around the edge of the Moon. According to NASA, the Moon will block 99.4 per cent of the Sun at its peak and will be visible very well from Northern India. The “ring of fire” can best be seen, just for a minute, from Suratgarh and Anupgarh in Rajasthan, Sirsa, Ratia and Kurukshetra in Haryana, and Dehradun, Chamba, Chamoli and Joshimath in Uttarakhand.

Effects of Solar eclipse on zodiac signs

Astrologers believe eclipse such as this will leave an impact on some positive effect or negative effect on different Zodiac signs. At this time, Sun and Rahu will conjoin in the sign of Gemini. Also, the Jupiter and Saturn will be in Capricorn sign. This time can bring financial emergency in world due to debilitation of natural karaka for wealth Jupiter and its retrograde position too. Moreover, Jupiter is hemmed between malefic from both sides with Saturn on one and Ketu on other. We can get relief when Ketu will leave Sagittarius and Jupiter will be all alone. Also, this will be the time when the world will get real benefits of Jupiter’s transit in Sagittarius. Sun & Rahu will conjoin in the sign of Gemini and Mrigashira Nakshatra. This nakshatra is ruled by planet Mars which is the planet of action. The effect of Solar eclipse is felt a month before the occurrence of the eclipse and effect remain the throughout 6-7month after from the date of the eclipse

Aries (Mesh) – Solar eclipse effecting the 3rd house of Aries, this may make them more attentive to domestic affairs. Professionals who are employed may receive good news as they struggle hard to maintain their positions at work.You might find yourself facing unexpectedly difficult conversations with family members or friends — so long as you’re authentic, you’ll be able to come to an agreeable conclusion.

Taurus (Vrishabh) – This solar eclipse will takes place in the second house for Taurus. As second house is mainly about finance and family, you remain concern about Family related expenses or may suffer a loss in their business.There are a lot of pressing issues calling for your attention right now, but before you get too distracted by all the information that’s flying around, make sure you’re in a financially stable place. This eclipse could bring up some issues involving your money flow, so keep tabs on anything that could affect your income or savings. You need to take due care about your eyes.

Gemini (Mithuna) – Solar eclipse takes place in your Gemini Zodiac Sign. Health could also be a major cause of concern. So, you need to take good care about health. Be careful about finances. Health of some family member must be issue more careful to them.Between this eclipse and Mercury retrograde being in your sign, the cosmos are not letting you off easy this time. You might be feeling a lot of confusion , which could make you a bit unsure about how to interact with others. Take time to just sit with your feelings and practice some much-needed self-care. Embrace your emotions and softer sentiments, Let your mind and body rest as you weather this storm.

Cancer (Karka Rashi) – Solar eclipse effecting twelfth house for Cancer. This may lead to loss of money or sudden major expense. Do not take unnecessary risk to regarding financial front and need to remain careful about health. You always put your heart and soul into your passions but this eclipse might drain your energy and put you in a much more introspective and slower-paced mood. Take time off and rest after all, you work hard and deserve a break. Spend some time meditating or otherwise giving your spiritual side a chance to come through.

Leo (Simha Rashi) – Solar eclipse effecting the eleventh house for Leo. This shall bring good opportunity to benefit financially. Those who are employed shall make growth in their careers. Take time off and rest,After all, you work hard and deserve a break. With the eclipse rocking your house of friends and community, don’t be surprised if relationships and dynamics within your social group start shifting or redefining themselves. Eclipses bring about inevitable changes, so your friends are showing their true colours.

Virgo (Kanya Rashi) – Solar eclipse takes place in the tenth house for Virgo. This may effect time on occupational front making it more challenging. Those who are employed will be under stress due to constant hammering by immediate boss to hurry up things and give more output. Get ready for some shifts in the way you approach things in your career. You’re examining the role you play through your job and reevaluating whether you’re comfortable with where things are headed.

Libra (Tula Rashi) – Solar eclipse takes place in the ninth house for Libra. No major health issue concerns in due course of time other than Issue related to respiratory system which needs to be attended quickly. The only good this is that if they are in business, they will gain profits. This eclipse is bringing an opportunity to learn something new, travel to an exotic locale, or acquire a new skill. Say yes to any opportunity that feeds your need for expansion.

Scorpio (Vrishchik Rashi) – Solar eclipse takes place in the eighth house for Scorpio. This may be not well for your health. Take proper precautionary measures to prevent any viral infection. Handle family and finance related matter tactfully and with due delicacy.
For most people, change can be difficult. It’s often easier to embrace the inevitable evolution that each day brings. That said, the revolutionary energy of this eclipse might actually be a welcome change of pace. Enjoy the transformative ride toward growth, you’re having revelations about your personal boundaries and realizing how much freedom there knows your own limits.

Sagittarius (Dhanu Rashi) – Solar eclipse takes place in the seventh house for Sagittarius. This shall bring profit to business. However, you need to remain careful about health issues. You’re likely experiencing some shifts in the way you relate to your partner. Love may create issues, so boundaries are important. If needed, spend some time alone with your thoughts and feelings in order to get in touch with your own needs and limits within your partnerships. If you can identify the problems clearly, then you have a much better chance of fixing them.

Capricorn (Makar Rashi) – Solar eclipse takes place in the sixth house for Capricorn. Things will be in your favour in due course of time. However, you need to have patience and look at ground reality and make move accordingly. And right now, you are feeling the need for change in a super personal way, as the way you function in day-to-day life is feeling stale and in need of a full-blown revamp. Thankfully, the eclipse’s winds of change are blowing through to give you a whole bunch of fresh energy to work with.

Aquarius (Kumbh Rashi) – Solar eclipse takes place in the fifth house for Aquarius. This may be able to cause issue in the concern relationship. You need to handle this much sensitively and with due delicacy. Things in the world are tough right now, and for a sensitive and empathic sign like you, it can really do a number on the soul. But remember: We can find love and beauty in just about anything, if we’re in the right mind-sets try to keep your heart open, as the eclipse might blow something sweet in your direction.Listen to your heart right now. Without major financial gain, you will be able to meet routine and incidental expenses comfortably.

Pisces (Meen Rashi) – Solar eclipse takes place in the fourth house for Pisces . You can remain in uncomfortable position on work front. No major financial gain for you is envisaged. Major health issues can concern you as an after effect of solar eclipse.
This eclipse is hitting you right in the feelings department you may find yourself lost in memories this time, trying to weigh the person you used to be against who you are now. It’s time to change your foundation and ignite new beliefs. Stay grounded while embracing evolution.

Do’s and Don’ts during Surya Grahan (Sutak)
1. You must not eat anything during Surya Grahan (Sutak). But this is not for pregnant ladies, children, old and sick people.
2. Drinking water, going to the washroom, sexual encounters, brushing teeth, combing hair and oil massage are the activities that are considered to be strictly prohibited during the Surya Grahan (Sutak).
3. It is advised that you do not witness the Surya Grahan with naked eyes because the ultraviolet radiation of the sun can permanently damage your retina and can even make you blind.
4. To spread positivity and neutralize the effects of Surya Grahan (Sutak), Chant holy mantras like the Gayatri Mantra and the Mahamrityunjaya Mantra and perform meditations during this time.

What to do after the Grahan subsides?
1. Food cooked during eclipse must be discarded immediately.
2. Take bath and wear clean clothes after eclipse has ended.
3. Cook fresh food and make offerings to your ancestors.
4. In order to pacify the planets as this would enhance your welfare, do some charity to Brahmins.

Dev Uthani Ekadashi2019 Dev Uthani Ekadashi2019

Dev Uthani Ekadashi2019

देवउठनी एकादशी में भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा से जागते हैं और तुलसी माता से उनका विवाह होता है।हिंदू धर्म में कार्तिक शुक्ल एकादशी को देव उठनी का पर्व मानाया जाता है, इस बार यह एकादशी 8 नवंबर (शुक्रवार )2019 को है।चार महीने से रुके सभी मांगलिक कार्य भी इस दिन से शुरू हो जाते हैं।सभी एकादशी में सबसे शुभ और मंगलकारी एकादशी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की देवोत्थान एकादशी मानी जाती है। इस एकादशी को देवउठनी एकादशी, देवप्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। है।कार्तिक में स्नानकरने वाली स्त्रियां एकादशी को भगवान विष्णु के रूप शालिग्राम एवं विष्णुप्रिया तुलसी का विवाह संपन्न करवाती हैं।पूर्ण रीति-रिवाज़ से तुलसी वृक्ष से शालिग्राम के फेरे एक सुन्दर मंडप के नीचे किए जाते हैं।विवाह में कई गीत,भजन व तुलसी नामाष्टक सहित विष्णुसहस्त्रनाम के पाठ किए जाने का विधान है।शास्त्रों के अनुसार तुलसी-शालिग्राम विवाह कराने से पुण्य की प्राप्ति होती है,दांपत्य जीवन में प्रेम बना रहता है। भगवान शालिग्राम और माता तुलसी का विवाह कराने से व्यक्ति के जीवन में सारे कलह, दुःख और रोग इत्यादि दूर हो जाते हैं। तुलसी शालिग्राम विवाह करवाने से कन्यादान के जितना ही पुण्य प्राप्त होता है।
कार्तिक मास में तुलसी रुपी दान से बढ़कर कोई दान नहीं हैं। देवउठनी एकादशी के दिन श्रीहरि को तुलसी चढ़ाना दस हज़ार गोदान के बराबर है।-भगवान विष्णु की पूजा माता तुलसी के बिना अधूरी मानी जाती है और कहा जाता है कि बिना तुलसी के भगवान विष्णु भोग भी नहीं चखते हैं। जिन दंपत्तियों के संतान नही है उनको तुलसी पाठ जरुर करना चाहिए। तुलसी जी की परिक्रमा करें। तुलसी के चारों ओर दीपदान करें।
इस दिन भगवान की विशेष कृपा पाने के लिए अपने घर पर दीपक जरूर जलाएं।साथ ही तीर्थ स्थान पर जाकर स्नान करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।धूप व दीप जलाकर पीले आसन पर बैठ तुलसी की माला लेकर विष्णु गायत्री मंत्र की जैसी श्रद्धा हो उसके अनुसार 1, 3, 5, 11 माला का फेरा करें। उसके साथ ही शेष मंत्रों का भी जाप करें। सभी एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ मानी जाने वाली इस एकादशी का व्रत करने वालों को स्वर्ग और बैकुंठ की प्राप्ति होती है।

विष्णु गायत्री महामंत्र- ऊं नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।

Saturn turns “Margi” on 18 september Saturn turns “Margi” on 18 september

Saturn turns “Margi” on 18 september

Saturn (Shani) the karmic planet turns Margi, It governs most of our key areas of life such as profession or married or love life spiritual life mental stability, debts, health and wellbeing.Saturn is the most powerful planet according to Vedic astrology which is why it is also wrongly famous as the most feared planet by people.In Vedic Astrology, Saturn is considered as the lawmaker and punisher who judge our actions.Due to this Saturn plays a prominent role in bringing stability to various aspects of the life of natives, and in helping them to progress. Saturn currently in retrograde since 30 April 2019.Saturn retrograde shows there was a problem with self-discipline or avoiding responsibility in a former life.Since it is a Karma-oriented planet, Saturn retrograde brings a lot of hard work in the lives of the natives.They have to labor more in all aspects of life to reach success.The duration of retrograde Saturn is the time to take off the burden and learn how to move ahead in life. You may be tested to make sure you are ready to take on the extra responsibility.The lessons you learn might be hard but they will be valuable.

18th September 2019 – Saturn turns Margi in Sagittarius ( Purva Ashadha Nakshatra ).‘Margi’ which means Direct and will be in direct motion until 24 January 2020 You will get freedom from most of your problems, move ahead on your path of responsibilities, and will also receive numerous new opportunities.As a rule, Saturn never gives malefic results unless it is unfavorably placed in your birth chart. Instead, the outcomes we receive depend on our Karma – the things.Saturn direct means it’s time to get back to business. It’s time to progress with a commitment, ending or construction project in the Sagittarius area of your chart.You can move on to the next stage of the build.Saturn’s direct motion will allow each of us to move ahead. Your movement may be slow but if you’re moving in the right direction, that’s good .Saturn Direct in Sagittarius can bring significant transformation in all aspects of life.During this period, Saturn can make you more organized, goal-oriented, and focused on materializing your desires.You should focus on bringing in material resources through perseverance and hard work. So, make use of these days of Saturn Direct in Sagittarius to harvest the benefits of your hard work.Saturn is turning direct in the 9th house of Dharma in the natural zodiac. The placement of Saturn in your birth chart can say a lot about the various aspects of your life especially your career, your love or married life, your spiritual orientation, your financial status, your health, and well-being.It also speaks a lot about the various lessons that one learns in life with the experiences gained.By the time Saturn stations direct, you should have come to terms with the relevant issues Focus and motivation leads to productiveness, achievement and recognition.There will be some lessons or extra effort required this life to pay back this karmic debt. Same time you can look at the results of other major transits because all of them will affect you in some way and are interrelated with each other. Using standard rules of Vedic Astrology we can easily find out how this Saturn transit is going to affect us and what special situations it is going bring for natives of each Zodiac sign.The final Saturn Ketu conjunction and now they move apart. Ketu is moving retrograde and Saturn direct.Their rare and painful embrace is over so while they remain in the same sign, their influence on each other diminishes.The optimal Saturn nature is disciplined, responsible, stable, respectful and reliable. A healthy Saturn is hard-working and dedicated.The aim is to be physically and emotionally strong enough to endure the hardships of life, to take responsibility for yourself and your family

Margi saturn’s effect on 12 Zodiac sign

Aries: Saturn Margi in Sagittarius will bring a lot of reliefs for Aries sign or ascendant native. Saturn is in your 9th house throughout. Be patient. Success would come through hard work and some possible delays. Career growth seems slow It can help you remove your bad karmic baggage and bring positivity into your life. When Saturn is Direct, it is believed that no extra efforts are required to pay back your karmic debts. With this upsurge of positivity, you can more easily manifest success in career,

Taurus: For the natives of Taurus sign, Saturn will be in the eighth house. This will get rid of troubles. The career will be affected for sure, but there can be some sudden good work opportunity for Taurus Your relationship with your spouse may not go that smooth. Avoid clashes. Maintain cordial relations with family members.Keep your emotions in check

Gemini: Due to the presence of Saturn in the seventh house of the zodiac of Gemini sign or ascendant native it’s the time when it will end, there were obstacles in your path due to Saturn Margi. You are more focused and doing hard work than before. Maintain a balance between your personal and professional life. Opposition in the working field will yield reverse benefits. New job seekers may find the lucky with this period.

Cancer: Saturn will be benefited in the court due to the passage in the sixth house. Of zodiac of Cancer.During this period, avoid any clashes or arguments Business health will remain well; however extra investment might be required for its expansion and growth in future. Native Will be able to go abroad. Extra stress may have to withstand retaining normal flow of money.Your siblings might seek your help during this time

Leo: Saturn being in the fifth house will Changes can be made to change jobs or house. There will be gains during this period, but they will come to you after persistence and handwork. Money and financial progress won’t come to you easily during this transit, but if you have the patience and understanding of the situation then, sure Saturn will bless you with long-lasting benefits.

Virgo: Shani will be in the fourth house to get land, buildings, and vehicles.Try not to get frustrated with other people who are not able to keep up with you.You might have to repeat yourself to those who misheard or were not paying attention.If you’re awaiting promotion, then Saturn will make you wait more and things will work out after some extra efforts..

Libra: Saturn being in the third house will increase the courage and the sum of the short journeys, promotion and is very good for people related to sports and politics.This time Saturn is moving to their 3rd house where Saturn performs well naturally and I am sure its effects will bless you with all-round success in

Scorpio: Now with Saturn transit through your second house will lead to many changes in life.First of all, your health will improve and all the laziness you were experiencing before will be gone.Your career will come on track, but slowly but surely.There will be sudden marriage plans in your mind Be extremely careful with new bank loans, credit cards, mort ages, investments, retail commitments, charity contracts and so on. Are you over-burdening yourself, Scorpio?

Sagittarius: Now with Saturn movement through your ascendant will bring some challenges in your life. Don’t place too much importance on your reputation, image or personal appearance as it is only part of your life, not all of it, and the new Saturn in Sagittarius cycle can mislead you There will be some serious delays in marriage and promotion, but Saturn won’t be denying it, with the support of Jupiter and hard work you will get through things. Overall Saturn direct which is better than the current one, but some tough situations will be there.

Capricorn: With Saturn’s movement through your 12th will lead to some hectic schedule for Capricorn.Expenditure may remain high in this period.You may find yourself in unwanted job postings and transfer is on the card for you. Before you sign up to a new group, club, team or society – or deepen your current commitment – do some quiet homework about whom and what is actually involved.Income will be remarkably good and could be expected better during Saturn Margi. Those who are looking for abroad ventures will be lucky with this period.

Aquarius: Saturn being in the 11th house of Aquarius: zodiac sign: will provide new opportunities with the sum of benefits .This transit is going to be great for you; there will be great financial gains, expansion in your network, health will improve and you will be ambitious, which will help you in a long run.You will taste success on all fronts.Problems will disappear all of a sudden. Chances of purchasing a house or a vehicle are there in your chart.Those who are suffering from any kind of health issue will see relief and chances of gains Fame and recognition are on your way.

Pisces: Saturn will be in the 10th house of Pisces: zodiac sign, which can get fame in the career field.This Margi Saturn will prove as a milestone for you, but it will happen with hard work and patience.Don’t lose your calm on small issues otherwise; there can be some arguments inside the house.New projects will be undertaken by you. You will get the unwavering support from your friends and subordinates.You will be able to get access to your dream house or car after next month

चंद्र ग्रहण 31जनवरी 2018 चंद्र ग्रहण 31जनवरी 2018

चंद्र ग्रहण 31जनवरी 2018

खग्रास चन्द्रग्रहण – 31 जनवरी 2018 (भूभाग में ग्रहण समय – शाम 5.17 से रात्रि 8.42 तक)

माघ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा (31जनवरी 2018 )इस दिन पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा। 176 वर्ष बाद यह ग्रहण माघ पूर्णिमा के अवसर पर लग रहा है। चंद्र ग्रहण का स्पर्श काल सायंकाल 05:18 बजे, मध्यम शाम 7:00 बजे और मोक्ष काल रात्रि 08:42 मिनट पर होगा। ग्रहण का सूतक सुबह 08:34 मिनट पर लग जाएगा। यह ग्रहण पूरे भारत में दिखेगा ।इस चंद्र ग्रहण का स्पर्श पुष्य नक्षत्र में होगा और समाप्ति श्लेषा नक्षत्र में होगी।कर्क राशि पर इस ग्रहण का प्रभाव कुछ ज्यादा ही पड़ेगा।

चन्द्रग्रहण के समय संयम रखकर जप-ध्यान करने से कई गुना फल होता है।

देवी भागवत में आता हैः सूर्यग्रहण या चन्द्रग्रहण के समय भोजन करने वाला मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उतने वर्षों तक अरुतुन्द नामक नरक में वास करता है। फिर वह उदर रोग से पीड़ित मनुष्य होता है फिर गुल्मरोगी, काना और दंतहीन होता है। अतः सूर्यग्रहण में ग्रहण से चार प्रहर (12 घंटे) पूर्व और चन्द्र ग्रहण में तीन प्रहर ( 9 घंटे) पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए। बूढ़े, बालकक और रोगी डेढ़ प्रहर (साढ़े चार घंटे) पूर्व तक खा सकते हैं। ग्रहण पूरा होने पर सूर्य या चन्द्र, जिसका ग्रहण हो, उसका शुद्ध बिम्ब देखकर भोजन करना चाहिए। यह चंद्र ग्रहण पुष्य+आश्लेशा नक्षत्र एवं कर्क राशि पर चरितार्थ रहेगा,अत इन नक्षत्र राशि वालों को ग्रहण दर्शन नही करना चहिये, वृष,कन्या,तुला कुम्भ राशि हेतु दर्शन करना शुभ सुखद

मेष कर्क, सिंह धनु राशि हेतु अशुभ दर्शन करना योग्य नही।

मिथुन वृश्चिक,मीन मकर राशि हेतु सामान्य मध्यम फलतः।

पूरे भारत में दिखेगा, नियम पालनीय ।यह चंद्र ग्रहण भारत वर्ष के अलावा अफगानिस्तान,पाकिस्तान,चीन ,नेपाल,बांग्लादेश,श्री लंका,कोरिया ,रूस,सम्भाग आदी मैं भी दृश्य प्रतीक होगा।

विशेष_ सूतक के समय और ग्रहण का समय भगवान की मूर्ति का स्पर्श नहीं करना चाहिए।सूतक और ग्रहण के समय भगवान के नाम का जप और दान करना चाहिए। वहीं पवित्र नदी में स्नान और हवन व दान का इस समय विशेष महत्व है। पूर्णिमा (31 जनवरी 2018 बुधवार ) को सूर्योदय से पूर्व स्नान ,विष्णु सहस्रनाम और श्रीमद भागवत गीता का पाठ विशेषतः करें और लाभ लें।

ग्रहण वेध के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियाँ डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं होते। जबकि पके हुए अन्न का त्याग करके उसे गाय, कुत्ते को डालकर नया भोजन बनाना चाहिए।

ग्रहण के स्पर्श के समय स्नान, मध्य के समय होम, देव-पूजन और श्राद्ध तथा अंत में सचैल(वस्त्रसहित) स्नान करना चाहिए। स्त्रियाँ सिर धोये बिना भी स्नान कर सकती हैं।

ग्रहणकाल में स्पर्श किये हुए वस्त्र आदि की शुद्धि हेतु बाद में उसे धो देना चाहिए तथा स्वयं भी वस्त्रसहित स्नान करना चाहिए।

ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जररूतमंदों को वस्त्र और उनकी आवश्यक वस्तु दान करने से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है। ग्रहण के समय कोई भी शुभ या नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।

ग्रहण के समय सोने से रोगी, लघुशंका करने से दरिद्र, मल त्यागने से कीड़ा, स्त्री प्रसंग करने से सूअर और उबटन लगाने से व्यक्ति कोढ़ी होता है। गर्भवती महिला को ग्रहण के समय विशेष सावधान रहना चाहिए।

भगवान वेदव्यास जी ने परम हितकारी वचन कहे हैं- सामान्य दिन से चन्द्रग्रहण में किया गया पुण्यकर्म (जप, ध्यान, दान आदि) एक लाख गुना और सूर्य ग्रहण में दस लाख गुना फलदायी होता है। यदि गंगा जल पास में हो तो चन्द्रग्रहण में एक करोड़ गुना और सूर्यग्रहण में दस करोड़ गुना फलदायी होता है।

ग्रहण के समय गुरुमंत्र, इष्टमंत्र अथवा भगवन्नाम जप अवश्य करें, न करने से मंत्र को मलिनता प्राप्त होती है। चीटियों को पिसा हुआ चावल व आटा डालें। मोती, चांदी, चावल, मिश्री, सफेद कपड़ा,

सफेद फूल, शंख, कपूर, श्वेत चंदन, पलाश की लकड़ी, दूध, दही, चावल, घी, चीनी आदि का दान करें।

इस चंद्र ग्रहण का हर राशि पर अलग प्रभाव होगा। उनसे जानें राशियों पर होने वाले चंद्र ग्रहण के प्रभाव के बारे में और साथ ही ये भी कि राशि के हिसाब से क्या दान करना चाहिए –

1. मेष- शारीरिक कष्ट। गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के समय ख़ास ख़याल रखने की ज़रूरत है। कामकाज में आ रहे बदलावों के कारण आपको लाभ मिलेगा। आप चाहें तो परेशानियों को मुस्कुराकर दरकिनार कर सकते हैं या उनमें फँसकर परेशान हो सकते हैं। धन का व्यय। मंगल से संबंधित दृव्यों गुड़ और मसूर की दाल का दान करें।

2. वृष- परिवार की शांति अचानक आयी समस्याओं की वजह से भंग हो सकती है। धन का व्यय। मानसिक चिंता। प्यार के सकारात्मक संकेत आपको मिलेंगे। श्री सूक्त का पाठ करें और मंदिर में अन्न दान करें।

3. मिथुन- व्यक्तिगत मार्गदर्शन आपके रिश्ते में सुधार लाएगा। ख़ुद को अभिव्यक्त करने के लिए अच्छा समय है- और ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कीजिए, जो रचनात्मक हों। रोग में वृद्धि। धन का व्यय। गो माता को पालक खिलाएं।

4. कर्क- छुपे हुए दुश्मन आपके बारे में अफ़वाहें फैलाने के लिए अधीर होंगे। वैवाहिक जीवन में सब कुछ अच्छा महसूस होगा। शारीरिक और मानसिक कष्ट। व्यय की अधिकता। शिव उपासना करें। चंद्रमा के बीज मंत्र का जप करें।

5. सिंह- आप अपनी भावनाओं पर क़ाबू रखने में दिक़्क़त महसूस करेंगे । प्रोपर्टी से जुड़े लेन-देन पूरे होंगे और लाभ पहुँचाएंगे। आपके परिवार वाले किसी छोटी-सी बात को लेकर राई का पहाड़ बना सकते हैं। अपने प्रिय के लिए बदले की भावना से कुछ हासिल नहीं होगा- बजाय इसके आपको दिमाग़ शांत रखना चाहिए । आज आपका जीवनसाथी आपकी सेहत के प्रति असंवेदनशील हो सकता है।धन का व्यय। गायत्री मंत्र का जप करें। धार्मिक पुस्तक का दान करें।

6. कन्या- सहकर्मियों और वरिष्ठों के पूरे सहयोग के चलते दफ़्तर में काम तेज़ रफ़्तार पकड़ लेगा। आप नए विचारों से परिपूर्ण रहेंगे और आप जिन कामों को करने के लिए चुनेंगे, वे आपको उम्मीद से ज़्यादा फ़ायदा देंगे।धन का आगमन लेकिन व्यय भी होगा। स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें। गाय को पालक खिलाएं।

7. तुला- आप पाएंगे कि आप दूसरों के लिए ज़्यादा और ख़ुद के लिए कम कर पा रहें है। मानसिक चिंता, धन की प्राप्ति, व्यय की अधिकता। श्री सूक्त का पाठ करें। अन्न का दान करें।

8. वृश्चिक- अपने मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दें, जो आध्यात्मिक जीवन के लिए आवश्यक है। मस्तिष्क जीवन का द्वार है, क्योंकि अच्छा-बुरा सब-कुछ इसी के माध्यम से आता है। यही ज़िंदगी की समस्याएँ दूर करने में सहायक सिद्ध होता है और सही सोच से इंसान को आलोकित करता है। भागीदारी वाले व्यवसायों और चालाकी भरी आर्थिक योजनाओं में निवेश न करें। जीवनसाथी के किसी अचानक काम की वजह से आपकी योजनाएँ बिगड़ सकती हैं। श्री बजरंग बाण का पाठ करें।

9. धनु- आर्थिक सफलता। पैसे कमाने के नए मौक़े मुनाफ़ा देंगे। घर वालों के साथ मिलकर कुछ अलग और रोमांचक किया जाना चाहिए। झूठ बोलने से बचें, क्योंकि यह आपके प्रेम-संबंध को बिगाड़ सकता है। साझीदारी के लिए अच्छे मौक़े हैं, लेकिन भली-भांति सोचकर ही क़दम बढ़ाएँ। स्वास्थ्य में समस्या। श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें। गाय को केला खिलाएं।

10. मकर- आर्थिक नुकसान। परिवार के सदस्यों की सेहत से जुड़ी दिक़्क़तें आपको मानसिक परेशानी दे सकती हैं। किसीकी दख़लअंदाज़ी के चलते आपके और आपके प्रिय के रिश्ते में दूरियाँ आ सकती हैं। स्वास्थ्य में परेशानी। श्री सुंदरकांड का पाठ करें। तिल का दान करें।

11. कुंभ- आर्थिक लाभ। रहेंगे। कामकाज में आ रहे बदलावों के कारण आपको लाभ मिलेगा। अगर आप यात्रा कर रहें है तो सभी ज़रूरी दस्तावेज़ साथ रखना न भूलें। जीवनसाथी के साथ यह दिन और दिनों की अपेक्षा बेहतर गुज़रेगा।स्वास्थ्य में परेशानी। श्री हनुमान बाहुक का पाठ करें। तिल का दान करें।

12. मीन- शिक्षा तथा प्रतियोगिता में सफलता।क्योंकि इसका बुरा असर आपके स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। रुका हुआ धन मिलेगा और आर्थिक हालात में सुधार आएगा। दोस्त शाम के लिए कोई बढ़िया योजना बनाकर आपका दिन ख़ुशनुमा कर देंगे। प्रेम हमेशा आत्मीय होता है और यही बात आप आज अनुभव करेंगे। कार्यालय में सबकुछ आपके पक्ष में जाता नज़र आ रहा है। स्वास्थ्य में परेशानी। श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें। गो माता को केला खिलाएं।

Bhrigumantra participated in 34th All India Astrology Summit held in Nabha Bhrigumantra participated in 34th All India Astrology Summit held in Nabha

Bhrigumantra participated in 34th All India Astrology Summit held in Nabha

At 34th All India Astrology Summit held in Nabha, Bhrigumatra team had predicted that Modi-Amit jodi will keep on rolling till 2019 elections. Moreover, under the leadership of Rahul Gandhi, Congress will nurture more than earlier but still will not be in majority before 2024. Even problems of many people were resolved during this summit.

जय शनिदेव जय शनिदेव

जय शनिदेव

ॐ।
जय शनिदेव

आज शनि अमावस्या है, जब शनिवार के दिन अमावस्या का समय हो तो इसे शनि अमावस्या कहा जाता है. जो शनिदेव की कृपा पाने के लिए विशेष लाभकारी है. इस बार ये अमावस्या विशेष संयोग लेकर आ रही है. इस दिन विशाला नक्षत्र में शोभन योग है. यह योग यदि शनिवार के दिन हो तो इससे उस दिन का, तिथि और नक्षत्र का प्रभाव कई गुना अधिक बढ़ जाता है. इसके पहले शनि अमावस्या पर शोभन योग वर्ष 1987 में बना था. इस दिन पूजा-पाठ करने से आपको शनि की विशेष कृपा मिलेगी।

30 साल बाद शोभन योगआज के दिन का संयोग बन रहा है. यह योग दान-पुण्य से लेकर बाजार से खरीदी व नए कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ रहेगा।

ग्रहों की गणना अनुसार वर्तमान में शनि धनु राशि में मार्गी है। इसके साथ ही सवा दो दिन के लिए चंद्र-बुध वृश्चिक राशि में युतिकृत रहेंगे. चूंकि बुध चंद्रमा के पुत्र होने से पिता-पुत्र का वृश्चिक राशि में शनि के साथ होने पर द्वादश: योग निर्मित होगा. चंद्रमा वनस्पति तो बुध व्यापार का सूचक होने से आने वाले समय में फसलों और कारोबार दोनों में वृद्धि करेंगे. वहीं वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल भी कन्या राशि में परिभ्रमण कर रहा है. यह अवस्था भी परस्पर मंगल-बुध का राशि परिवर्तन कहलाती है. इससे नए कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होकर सफलता मिलेआज के दिन मनुष्य को सरसों का तेल, उड़द, काला तिल, देसी चना, कुलथी गुड शनियंत्र, और शनि संबंधी समस्त पूजन सामग्री अपने ऊपर वार कर शनिदेव के चरणों में चढ़ाकर शनिदेव का तैलाभिषेक करना चाहिए।

शनि अमावस्य के दिन श्री शनिदेव की आराधना करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होंती हैं. कालसर्प योग, ढैय्या तथा साढ़ेसाती सहित शनि संबंधी अनेक बाधाओं से मुक्ति पाने का यह दुर्लभ समय होता है जब शनिवार के दिन अमावस्या का समय हो जिस कारण इसे शनि अमावस्या कहा जाता है।

शनि अमावस्या पितृदोष से मुक्ति दिलाए

अमावस्या का विशेष महत्व है और अमावस्या अगर शनिवार के दिन पड़े तो इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है. शनिदेव को अमावस्या अधिक प्रिय है. शनि देव की कृपा का पात्र बनने के लिए शनिश्चरी अमावस्या को सभी को विधिवत आराधना करनी चाहिए. भविष्यपुराण के अनुसार शनिश्चरी अमावस्या शनिदेव को अधिक प्रिय रहती है।

शनैश्चरी अमावस्या के दिन पितरों का श्राद्ध अवश्य करना चाहिए. जिन व्यक्तियों की कुण्डली में पितृदोष या जो भी कोई पितृ दोष की पिडा़ को भोग रहे होते हैं उन्हें इस दिन दान इत्यादि विशेष कर्म करने चाहिए. यदि पितरों का प्रकोप न हो तो भी इस दिन किया गया श्राद्ध आने वाले समय में मनुष्य को हर क्षेत्र में सफलता प्रदान करता है, क्योंकि शनिदेव की अनुकंपा से पितरों का उद्धार बडी सहजता से हो जाता है।

शनि अमावस्या पूजन ।

पवित्र नदी के जल से या नदी में स्नान कर शनि देव का आवाहन और दर्शन करना चाहिए. शनिदेव का पर नीले पुष्प, बेल पत्र, अक्षत अर्पण करें. शनिदेव को प्रसन्न करने हेतु शनि मंत्र “ॐ शं शनैश्चराय नम:”, अथवा “ॐ प्रां प्रीं प्रौं शं शनैश्चराय नम:” मंत्र का जाप करना चाहिए. इस दिन सरसों के तेल, उडद, काले तिल, कुलथी, गुड शनियंत्र और शनि संबंधी समस्त पूजन सामग्री को शनिदेव पर अर्पित करना चाहिए और शनि देव का तैलाभिषेक करना चाहिए. शनि अमावस्या के दिन शनि चालीसा, हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ अवश्य करना चाहिए. BM.com

जिनकी कुंडली या राशि पर शनि की साढ़ेसाती व ढैया का प्रभाव हो उन्हें शनि अमावस्या के दिन पर शनिदेव का विधिवत पूजन करना चाहिए।www.bhrigumantra.com

इस दिन महाराज दशरथ द्वारा लिखा गया शनि स्तोत्र का पाठ करना चाहिए और उनके पास समय की कमी है वह सफर में शनि नवाक्षरी मंत्र अथव
“कोणस्थ: पिंगलो बभ्रु: कृष्णौ रौद्रोंतको यम:। सौरी..
“कोणस्थ: पिंगलो बभ्रु: कृष्णौ रौद्रोंतको यम:। सौरी: शनिश्चरो मंद:पिप्पलादेन संस्तुत:।।”मंत्र का जप करने का प्रयास करते हैं करें तो शनि देव की पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।
जय शनिदेव

शुभ धनतेरस 2017 शुभ धनतेरस 2017

शुभ धनतेरस 2017

इस साल 17 अक्टूबर को धनतेरस का त्योहार मनाया जाएगा । धनतेरस के दिन ना केवल अपार धन-संपदा पाई जा सकती है बल्कि आप सेहत और सौभाग्य का वरदान भी पा सकते हैं । कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी पर जब ग्रहों और नक्षत्रों का अद्धुत संयोग बनता है, तब होती है धनतेरस की पूजा। इससे प्रसन्न होते हैं कुबेर और धन-संपत्ति और वैभव का वरदान देते हैं। ये वो पूजा है जिससे देवताओं के वैद्य धनवंतरि आरोग्य का सुख प्रदान करते हैं और अकाल मृत्यु के भय का नाश करते हैं ।

पुराणों में धनतेरस की पूजा को बेहद कल्याणकारी बताया गया है । इसे धन त्रियोदशी भी कहते हैं ।

कैसे करें पूजन
धनतेरस कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन यानी दिवाली दो दिन पहले मनाया जाता है । इस दिन सबसे पहले तेल लगाकर नहाएं और फिर लाल या गुलाबी कपड़े पहनें । पूजन में सबसे पहले गणेश-लक्ष्मी जी और कुबेर की पूजा करें । गणेश जी सारी बाधाएं दूर करेंगे, लक्ष्मी जी धन लाभ देंगी और कुबेर पैसे की बचत कराएंगे । इस तरह घर में बरकत आएगी । कुबेर को कमल का फूल, गुलाब की माला नारियल, बर्फी, केले और मखाने का भोग लगाएं। गुग्गल की धूप जलाएं और घी का दीपक जलाएं । फिर इस मंत्र का जाप करें : ॐ गणपति देवाय नमः, ॐ श्रिये नमः, ॐ कुबेराय नमः ।

धनतेरस को होती है धनवंतरि जयंती

मान्यता है कि धनवंतरि देव समुद्र मंथन से निकले थे । वह आरोग्य, आयु, धन और सुख देते हैं। धनवंतरि देव विघ्न विनाशक भी हैं। इन्हें गेंदे के फूल की माला चढ़ाएं, चंदन लगाएं । दूध, दही, शक्कर, शहद और घी मिलाकर पंचामृत बनाएं । पंचामृत को धनवंतरि देव को चढ़ाएं । सेब और बर्फी, पैसे चढ़ाएं और घी के दीपक से आरती करें । इसके बाद ॐ धन्वन्तरये नमः मंत्र का जाप करें ।

धनतेरस वाले दिन खरीदारी करने का शुभ मुहूर्त:  शाम 07:16 बजे से 08:18 बजे तक का है ।

इन चीजों को खरीदने पर मिलेगा लाभ
इस साल धनतेरस मंगलवार को पड़ा है। इसलिए धातु में सोना और तांबे की चीज की खरीदारी फायदेमंद रहेगी। मकान और जमीन खरीदने के लिए भी ये दिन शुभ माना जाता है । अन्य चीज खरीदने पर आप को दिक्कत होगी ।

कैसे करें दीपदान
धनतेरस पर दीपदान का भी विशेष महत्व होता है । शाम को दीपदान जरूर करें । घर के मुख्य द्वार पर तिल के तेल का चारमुखी दीपक जलाएं । थाली में यमराज के लिए सफेद बर्फी, तिल की रेवड़ी या तिल मुरमुरे के लडडू, एक केला और एक गिलास पानी रखें ।

सिंदूर या हल्दी में गाय का शुद्ध घी या चमेली का तेल एवं इत्र मिला कर घर के मुख्य द्वार पर लाभ चौगडिया में श्रद्धा पूर्वक हरी नाम का जाप करते हुए स्वास्तिक, ॐ, शुभ, लाभ, रिद्धि, सिद्धि, आदि जरुर लिखें।

श्रीयन्त्र की स्थापना एक नवीन कमलगट्टे की माला पर करें और अगर हो सके तो नित्यप्रति श्रीयन्त्र पर नागकेशर जरुर चढ़ाएं कमलगट्टे पर स्थापित श्रीयन्त्र पर नागकेशर चढाने से इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है ।

चिर स्थाई लक्ष्मी प्राप्ति के लिए धनतेरस से दीपावली तक भगवान् कुबेर का पूजन अवश्य ही करें ।

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